Friday, December 27, 2019

CAA: जुमे की नमाज से पहले उत्तर प्रदेश के 75 में से 21 ज़िलों में इंटरनेट सेवा बंद

नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर हुई हिंसा के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज़ को देखते हुए 21 ज़िलों में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि राज्य के 21 ज़िलों में इंटरनेट सेवा शुक्रवार को स्थगित रहेगी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा है कि "राज्य में क़ानून व्यवस्था पूरी तरह क़ाबू में है, हम सुरक्षाबलों की रणनीतिक तैनाती में लगातार लगे हैं और एसआईटी की टीम विभिन्न मामलों की तफ़्तीश में लगी है. हमने 21 ज़िलों में इंटरनेट सेवा स्थगित कर दी है, जैसे जैसे स्थिति सामान्य होती जाएगी इंटरनेट सेवा बहाल करते जाएंगे."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में सबसे ज़्यादा हिंसक प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में देखने को मिले हैं. यहां इन प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों की मौत हुई है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बीते हफ़्ते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में मरने वाले 16 में से 14 लोगों की मौत गोली लगने से हुई. अख़बार से इस बात की पुष्टि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने की है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

बाकी के दो लोगों में फ़िरोज़ाबाद में राशिद की मौत सिर पर चोट लगने से और वाराणसी में आठ वर्षीय मोहम्मद सगीर की मौत भगदड़ में दबने से हुई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

लोगों की मौत गोली लगने से हुई है उनकी पहचान इस प्रकार की गई है. मोहम्मद वकील (32 साल) लखनऊ, आफ़ताब आलम (22 साल) और मोहम्मद सैफ़ (25 साल) कानपुर में, अनस (21 साल) और सुलैमान (35 साल) बिजनौर में, बिलाल (24 साल) और मोहम्मद शेहरोज़ (23 साल) संभल में, जहीर (33 साल), आसिफ़ (20 साल) और आरिफ़ (20 साल) मेरठ में, नबी जहान (24 साल) फ़िरोज़ाबाद में और फ़ैज़ ख़ान (24 साल) रामपुर में.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

वहीं पुलिस का कहना है कि उन्होंने प्लास्टिक की गोलियों और रबर की गोलियों के अलावा और कुछ इस्तेमाल नहीं किया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने उत्तर प्रदेश के एडीजी (क़ानून-व्यवस्था) पीवी रामा शास्त्री के हवाले से बताया, "हमने राज्य के अलग अलग ज़िलों में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है और लोगों से बातचीत की है."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इस दौरान उन्होंने कहा कि पुलिस सोशल मीडिया पर डाले जा रहे कंटेंट की निगरानी कर रही है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

19 से 21 दिसंबर के बीच समूचे उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में हिंसा भड़की थी. पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराते हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दो प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी करते हुए तस्वीरों और वीडियो की एक सीरीज जारी की. उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने दावा किया कि इस हिंसा में पुलिस को भी भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "21 ज़िलों में भड़की हिंसा में 288 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. उनमें से 62 पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल हुए हैं."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर हुई हिंसा के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज़ को देखते हुए 21 ज़िलों में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि राज्य के 21 ज़िलों में इंटरनेट सेवा शुक्रवार को स्थगित रहेगी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा है कि "राज्य में क़ानून व्यवस्था पूरी तरह क़ाबू में है, हम सुरक्षाबलों की रणनीतिक तैनाती में लगातार लगे हैं और एसआईटी की टीम विभिन्न मामलों की तफ़्तीश में लगी है. हमने 21 ज़िलों में इंटरनेट सेवा स्थगित कर दी है, जैसे जैसे स्थिति सामान्य होती जाएगी इंटरनेट सेवा बहाल करते जाएंगे."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में सबसे ज़्यादा हिंसक प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में देखने को मिले हैं. यहां इन प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों की मौत हुई है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बीते हफ़्ते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में मरने वाले 16 में से 14 लोगों की मौत गोली लगने से हुई. अख़बार से इस बात की पुष्टि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने की है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

बाकी के दो लोगों में फ़िरोज़ाबाद में राशिद की मौत सिर पर चोट लगने से और वाराणसी में आठ वर्षीय मोहम्मद सगीर की मौत भगदड़ में दबने से हुई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

लोगों की मौत गोली लगने से हुई है उनकी पहचान इस प्रकार की गई है. मोहम्मद वकील (32 साल) लखनऊ, आफ़ताब आलम (22 साल) और मोहम्मद सैफ़ (25 साल) कानपुर में, अनस (21 साल) और सुलैमान (35 साल) बिजनौर में, बिलाल (24 साल) और मोहम्मद शेहरोज़ (23 साल) संभल में, जहीर (33 साल), आसिफ़ (20 साल) और आरिफ़ (20 साल) मेरठ में, नबी जहान (24 साल) फ़िरोज़ाबाद में और फ़ैज़ ख़ान (24 साल) रामपुर में.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

वहीं पुलिस का कहना है कि उन्होंने प्लास्टिक की गोलियों और रबर की गोलियों के अलावा और कुछ इस्तेमाल नहीं किया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने उत्तर प्रदेश के एडीजी (क़ानून-व्यवस्था) पीवी रामा शास्त्री के हवाले से बताया, "हमने राज्य के अलग अलग ज़िलों में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है और लोगों से बातचीत की है."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इस दौरान उन्होंने कहा कि पुलिस सोशल मीडिया पर डाले जा रहे कंटेंट की निगरानी कर रही है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

19 से 21 दिसंबर के बीच समूचे उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में हिंसा भड़की थी. पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराते हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दो प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी करते हुए तस्वीरों और वीडियो की एक सीरीज जारी की. उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने दावा किया कि इस हिंसा में पुलिस को भी भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "21 ज़िलों में भड़की हिंसा में 288 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. उनमें से 62 पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल हुए हैं." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

Monday, December 9, 2019

नागरिकता संशोधन बिल: असम क्यों उबल रहा है

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों ख़ासकर असम में नागरिकता संशोधन बिल के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों का गुस्सा अब कई तरह से सामने आ रहा है.

विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोग "आरएसएस गो-बैक" के नारे लगा रहें है, साथ ही अपने नारों में सत्ताधारी बीजेपी को सतर्क कर रहें है.

सड़कों पर उतरे ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के कार्यक्रताओं ने इससे पहले नगरिकता बिल के ख़िलाफ़ मशाल जुलूस निकाल कर अपना विरोध जताया. वहीं, स्थानीय कलाकार, लेखक- बुद्धिजीवी समाज और विपक्षी दलों के लोग अलग-अलग तरीकों से अपना विरोध जता रहे हैं.

नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) को संक्षेप में CAB भी कहा जाता है और यह बिल शुरू से ही विवादों में रहा है.

असम के डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, धेमाजी, शिवसागर और जोरहाट ज़िले के कई जगहों पर सोमवार को विरोध प्रदर्शन कर रहें लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर यातायात व्यवस्था ठप कर दी. वहीं रेल की आवाजाही ठप करने और पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों के टकराव की ख़बरें भी सामने आ रही हैं.

इस बीच, ऑल असम सूटीया स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन और ऑल असम मोरान स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने सोमवार सुबह से असम में 48 घंटे का बंद बुलाया है जिसका ऊपरी असम के करीब आठ ज़िलों में व्यापक असर देखने को मिल रहा है.

इन ज़िलों में बाज़ार पूरी तरह बंद है और सड़कों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है. नागरिकता संशोधन बिल का विरोध कर रहे ये छात्र संगठन बीते कुछ महीनों से यहां की छह जनजातियों को अनुसूचित जनजाति यानी एसटी का दर्जा देने की मांग करते आ रहें है.

इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों के छात्र निकाय नार्थ ईस्ट स्टूडेंटस ऑर्गनाइजेशन ने मंगलवार को सुबह 5 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक पूर्वोत्तर राज्यों में बंद का आह्वान किया है. राज्य के करीब 30 नागरिक संगठनों ने स्टूडेंटस ऑर्गेनाइजेशन के इस बंद को अपना समर्थन दिया है. हालांकि व्यापक स्तर पर हो रहे विरोध के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 लोकसभा में पेश कर दिया है.

नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 सदन में पेश करने के बाद ही ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के सदस्यों ने गुवाहाटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल समेत भाजपा सरकार के कई नेता-मंत्रियों के पुतले फूंक कर अपना विरोध दर्ज किया.

इस नागरिकता बिल को लेकर सोशल मीडिया पर सैकड़ो की तादाद में लोग मुख्यमंत्री सोनोवाल के ख़िलाफ़ अपना गुस्सा दिखा रहें हैं.

मुख्यमंत्री सोनोवाल ने अपनी फेसबुक पेज पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा था कि असम को अगर औद्योगीकरण के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है तो इसके लिए राज्य में शांति का माहौल होना आवश्यक है.

इस विवादित बिल के ख़िलाफ़ गुवाहाटी विश्वविद्यालय के एक छात्र ने अपने ख़ून से एक संदेश लिखकर विरोध जताया है. सोशल मीडिया पर इस छात्र का एक वीडियो फुटेज वायरल हो रहा है, जहां वो अपनी कटी हुई कलाई के ख़ून से लिखकर इस बिल का विरोध कर रहा है.

दरअसल पूर्वोत्तर राज्यों के स्वदेशी लोगों का एक बड़ा वर्ग इस बात से डरा हुआ है कि इन शर्णाथियों के प्रवेश से उनकी पहचान, भाषा और संस्कृति ख़तरे में पड़ जाएगी.

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के मुख्य सलाहकार समुज्जवल भट्टाचार्य भाजपा पर नागरिता संशोधन बिल की आड़ में हिंदू वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते है.

वो कहते है, "यह बात अब स्थापित हो गई है कि कांग्रेस ने बांग्लादेशी नागरिकों को सुरक्षा देने के लिए हमपर आईएमडीटी कानून थोपा था और अब बीजेपी अवैध बांग्लादेशी लोगों को सुरक्षा देने के लिए हम लोगों पर नागरिकता संशोधन बिल थोप रही है. इन सबको बांग्लादेशियों का वोट चाहिए. लेकिन असम के लोग किसी भी कीमत पर इस बिल को स्वीकार नहीं करेंगे."

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन से छात्र राजनीति की शुरूआत करते हुए असम के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे सर्वानंद सोनेवाल ने प्नदेश में हो रहे व्यापक आंदोलन को देखते हुए कहा,"हमारी सरकार ने कभी भी जाति को नुकसान नहीं पहुंचाया है और कभी नहीं पहुंचाएगी."

"हम असमिया जाति की सुरक्षा के लिए शुरू से काम कर रहें है और आप लोग हमारे काम को देख रहें हैं. मैं आंदलोन कर लोगों को आह्वान करता हूं कि आप लोग आंदोलन के जरिए असम का भविष्य नहीं बदल सकते."

नागरिकता संशोधन बिल के पारित हो जाने से क्या असमिया जाति, भाषा और उनकी संस्कृति पूरी तरह खत्म हो जाएगी. इस सवाल का जवाब देते हुए वरिष्ठ पत्रकार बैकुंठ नाथ गोस्वामी कहते है, "अगर कैब लागू हो जाता है तो अपने ही प्रदेश में असमिया लोग भाषाई अल्पसंख्यक हो जाएंगे. असम में सालों पहले आकर बसे बंगाली बोलने वाले मुसलमान पहले अपनी भाषा बंगाली ही लिखते थे लेकिन असम में बसने के बाद उन लोगों ने असमिया भाषा को अपनी भाषा के तौर पर स्वीकार कर लिया."

"राज्य में असमिया भाषा बोलने वाले 48 फीसदी लोग हैं और अगर बंगाली बोलने वाले मुसलमान असमिया भाष छोड़ देते है तो यह 35 फीसदी ही बचेंगे. जबकि असम में बंगाली भाषा 28 फीसदी है और कैब लागू होने से ये 40 फीसदी तक पहुंच जाएगी. फिलहाल असमिया यहां एकमात्र बहुसंख्यक भाषा है."

"वो दर्जा कैब के लागू होने से बंगाली लोगों के पास चला जाएगा. इसके अलावा कैब के लागू होने से यहां धार्मिक आधार पर राजनीतिक ध्रुवीकरण ज्यादा होगा. स्थानीय और क्षेत्रिय मूद्दो की अहमियत घटेगी. भाजपा और आरएसएस के लोग हिंदू के नाम पर सभी लोगों को एक टोकरी में लाने के लिए शुरू से काम कर रहे हैं और काफी हद तक यहां सफल भी हुए हैं."

Tuesday, December 3, 2019

विक्रम को खोजने में नासा की मदद करने वाला भारतीय इंजीनियर

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चंद्रयान 2 के लैंडर विक्रम को खोजने का श्रेय चेन्नई स्थित इंजीनियर षणमुग सुब्रमण्यन को दिया है.

नासा ने विक्रम के पाए जाने की पुष्टि करते हुए एक बयान जारी कर बताया है कि षणमुग सुब्रमण्यन ने नासा के एलआरओ प्रोजेक्ट (लुनर रिकॉनाएसंस ऑरबिटर) को मलबे मिलने के बारे में संपर्क किया था और ये जानकारी मिलने के बाद एलआरओ टीम ने पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना कर विक्रम के मलबे मिलने की पुष्टि की.

नासा ने अपने बयान में लिखा है, "इन मलबों को सबसे पहले षणमुग ने उस जगह से लगभग 750 मीटर दूर ढूँढ निकाला जहाँ वो गिरा था और ये उसकी एकमात्र स्पष्ट तस्वीर थी. "

नासा के एलान के बाद षणमुग ने भी ट्विटर पर लिखा, "नासा ने चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर को खोजने के लिए मुझे श्रेय दिया है."

बीबीसी संवाददाता प्रमिला कृष्णन ने नासा की पुष्टि के बाद षणमुग से बात की जिसमें उन्होंने कहा, "मैंने विक्रम के मलबे के एक छोटे से हिस्से को खोजा, नासा ने इसके बाद उस जगह के आस-पास और भी मलबे खोज निकाला और उस जगह का भी पता लगाया जहाँ वो गिरा था."

अपने फ़ेसबुक एकाउंट पर 33वर्षीय षणमुग ने ख़ुद का परिचय बड़ा दिलचस्प लिखा है - No one knows about me ;) मेरे बारे में कोई नहीं जानता.

फ़ेसबुक पर षणमुग के एकाउंट पर दी गई जानकारी के अनुसार वो मूलतः मदुरै शहर के रहने वाले हैं और अभी चेन्नई में रहते हैं.

यहीं लिखा है कि वो अभी लेनक्स इंडिया टेक्नोलॉजी सेंटर में टेक्निकल आर्किटेक्ट हैं और इससे पहले अमरीकी मल्टीनेशनल आईटी कंपनी कॉग्निज़ैंट में काम कर चुके हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया," मैंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की मगर मैं एक आईटी प्रोफ़ेशनल हैं और काम के अलावा वेबसाइट और ऐप डिज़ाइन करता हूँ जिसमें से कुछ को न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी रिव्यू किया है. इनमें एक टेक्स्ट ओनली रीडर ऐप भी है."

चंद्रयान-2 मिशन के तहत विक्रम लैंडर को सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर उतारा जाना था मगर 47 दिनों की यात्रा के बाद लैंडिंग के थोड़ी देर पहले 2.1 किलोमीटर दूर पहले इसरो से उसका संपर्क टूट गया.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने अगले दिन कहा कि उसने लैंडर को खोज लिया है मगर उन्होंने इसकी कोई तस्वीर कभी भी जारी नहीं की.

नासा का एक यान - एलआरओ प्रोजेक्ट (लुनर रिकॉनाएसंस ऑरबिटर) सितंबर से ही कई बार उस जगह के ऊपर से गुज़र रहा था मगर उसे भी कोई साफ़ तस्वीर नहीं मिल पा रही थी.

इसी बीच कई और लोगों की ये पता लगाने में दिलचस्पी थी कि विक्रम कहाँ गया और इनमें भारतीय कंप्यूटर प्रोग्रामर और मेकैनिकल इंजीनियर षणमुग सुब्रमण्यन भी शामिल थे.

षणमुग ने अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया, "विक्रम के क्रैश करने से ना केवल मुझे बल्कि मेरे जैसे कई लोगों को चांद को लेकर दिलचस्पी हुई. मुझे लगता है विक्रम अगर सही तरीक़े से लैंड करता तो शायद इतनी दिलचस्पी ना होती. इसके बाद मैं तस्वीरों को स्कैन करने लगा."

षणमुग ने विक्रम की गति और स्थिति की अंतिम जानकारी के आधार पर एक जगह कुछ सफ़ेद धब्बों को देखा जो पहले की तस्वीरों में नहीं दिखती थी.

इसके बाद उन्होंने नासा से संपर्क किया और 27 सितंबर, 28 सितंबर, 3 अक्तूबर और 17 नवंबर को ट्वीट किए.

3 अक्तूबर को उन्होंने उस जगह की पहले और बाद की तस्वीरों के साथ ट्वीट किया, क्या ये विक्रम लैंडर है? (लैंडिंग की जगह से 1 किलोमीटर दूर) लैंडर शायद चंद्रमा पर रेत के नीचे दबा हो?

Wednesday, November 20, 2019

مدرب إنجلترا يدافع عن لاعبي مان يونايتد بعد هجوم مورينو

دافع جاريث ساوثجايت، المدير الفني المؤقت لمنتخب إنجلترا، عن لاعبي مانشستر يونايتد كريس سمولنغ، وليوك شو بعد الانتقادات الحادة التي واجهها من قبل المدير الفني لناديهما جوزيه مورينو.

ووجه مورينو اللوم إلى اللاعبين لغيابهما عن مباراة الفريق أمام سوانزي الذي فاز فيه مان يونايتد بثلاثة أهداف مقابل هدف واحد يوم الأحد الماضي.

وقال المدير الفني لأولد ترافورد للاعبيه: "من أجل الفريق، لابد أن تفعلوا أي شيء".

وكان سمولنغ يعاني من إصابة في القدم بينما شارك شو في مباراة مان يونايتد أمام فنربخشة التركي في إطار دوري أبطال أوروبا يوم الخميس الماضي، وهي المباراة التي خسرها الفريق الإنجليزي.

وقال ساوثجايت إنه "من الواضح أن خطب ما سيء ألم باللاعبيْن".

وغاب لاعب قلب الدفاع سمولنغ، 26 سنة، والظهير الأيسر شو، 21 سنة، عن تشكيل منتخب إنجلترا يوم الجمعة أمام منتخب أسكتلندا في إطار التصفيات المؤهلة لكأس العالم 2018 الجمعة الماضية، كما لن ينضما إلى الفريق في المباراة الودية لمنتخب بلادهما أمام منتخب إسبانيا التي من المقرر إقامتها الأسبوع المقبل.

وشارك شو في ست مبارايات هذا الموسم منذ عودته من الإصابة بكسر مضاعف في الساق في سبتمبر/ أيلول الماضي.

ولدى سؤاله عما إذا كان اللاعبان "مدللان"، قال المدير الفني المؤقت لمنتخب إنجلترا: "لم أكون هذا الانطباع عنهما".

وأضاف: "أعرف ليوك جيدا، فقد كان يعاني من إصابة بالغة، وأعتقد أنه من السهل أن نحكم على الأشياء على أساس ما نراه من دون أن نعرفهم جيدا".

وشارك اللاعبان في عدد من المباريات بعد حقنهما بمسكنات للآلام هذا الموسم، وأشارت تقارير إلى أن شو "مندهش" من انتقادات مورينو.

موارد طبيعية
الأهداف الاقتصادية الروسية من النفوذ في أفريقيا واضحة، إذ تعاني من نقص في معادن مثل المنغنيز والبوكسيت والكروم، وكلها مهمة بالنسبة للصناعة.

كما أن لها خبرة في قطاع الطاقة، يمكنها نقلها إلى الدول الغنية بالموارد.

وتنقب الشركات الروسية حاليا عن البوكسيت في غينيا، وتبرم صفقات لاستخراج الألماس في أنغولا، وتحصل على موافقات لاستخراج الغاز الصخري من موزمبيق.

وذكرت تقارير أن شركة الطاقة الروسية العملاقة، لوكويل، دشنت مشروعات في الكاميرون وغانا ونيجيريا، وتبحث في الحصول على صفقات في الكونغو.

كما تقدم روسيا خبرات تكنولوجيا الطاقة النووية لعدد من الدول الأفريقية، من بينها إنشاء أول مفاعل نووي في مصر العام القادم، بقرض قدره 25 مليار دولار.